शनिवार, 25 जून 2016

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत – श्री विमलेश कुमार त्रिपाठी (देवरिया)

श्री विमलेश कुमार त्रिपाठी
जी हाँ, आइए, आप लोगों को मैं श्री विमलेश कुमार त्रिपाठी से मिलवाता हूँ। विमलेश कुमार त्रिपाठीजी नोनापार (देवरिया) के रहने वाले हैं और अभी हाल में ही इनकी पोस्टिंग झारखंड में डीवाईएसपी (Dysp) के पोस्ट पर हुई है। श्री विमलेशजी का परिवार सादगी का धनी है तथा इनकी परवरिश ज्ञान के परिवेश में हुई है। बचपन से ही कुशाग्रबुद्धि विमलेश जी अध्ययन के प्रति सदा गंभीर रहे हैं और पढ़ाई के साथ ही साथ जनसेवा में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते आए हैं।

नोनापार (देवरिया) के रहने वाले श्री विमलेश त्रिपाठी के पिता श्री विश्वम्भर त्रिपाठीजी क्षेत्र-जिले के एक सम्मानित व्यक्ति हैं और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं। अपने पिता के मार्गदर्शन में विमलेशजी ने इस ऊँचाई को छूते हुए अपने घर-परिवार-गाँव-गड़ा के साथ ही अपने जिले देवरिया का नाम रोशन किया है। श्री विमलेश जी ने यह दर्शा दिया कि अगर सही रणनीति के साथ परिश्रम किया जाए तो वह व्यर्थ नहीं जाता।

विमलेशजी ने बताया कि अपनी क्षमता को आंकने के साथ ही अगर कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो दिन-रात परिश्रम करके मंजिल को हासिल किया जा सकता है पर यह जरूरी है कि सही दिशा में कदम बढ़ाया जाए और मंजिल को ध्यान में रखा जाए। साथ ही विमलेशजी यह भी कहते हैं कि अध्ययन की बात हो या कोई और हमें अति से पार नहीं जाना चाहिए और जीवन में अपने कर्तव्य का सही निर्वहन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए तो मंजिल पाना आसान हो जाता है।
माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड के हाथों डीवाईएसपी का नियुक्ति-पत्र ग्रहण करते हुए

विमलेशजी की इच्छा थी कि वे एक बड़े अधिकारी बने, क्योंकि बचपन से ही वे ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं, चुनौतियों आदि को देखते आ रहे हैं और सदा इन समस्याओं को दूर करने की एक हसरत उनके हृदय में कसक देती रही है। अब वे अपनी मंजिल पाकर जनसेवा में पूरी तरह से अपने को झोंक देने के लिए तैयार हैं। देवरिया की ओर से हम उनके मंगलमय जीवन की कामना करते हुए, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से आगे बढ़ने की कामना रखते हैं।


-पं. प्रभाकर पांडेय गोपालपुरिया

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (27-06-2016) को "अपना भारत देश-चमचे वफादार नहीं होते" (चर्चा अंक-2385) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'